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राष्ट्रीय जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में पीएच.डी. घोटाला
May 12, 2020 • विनोद पान्डेय • मध्यप्रदेश

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में पीएच.डी. भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र-उत्तर पुस्तिका में हेराफेरी, आज दिनांक तक स्नातक में ही आठ से दस बार फैल होने वाली छात्रा को बिना स्थानांतरण प्रमाणपत्र  के पीएच.डी. में प्रवेश देने, फर्जी ढंग से यूजीसी की छात्रवृत्ति दिलवाने तथा विदेश भेजने, पीएच.डी. में प्रवेश हेतु करायी गयी अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में अव्वल स्थान दिलाने के लिए छात्रा को गोवा ले जाने वाले आईजीएनटीयू के प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी  पर समाज के साथ धोखाधड़ी के मामले में प्रथम सूचना प्रतिवेदन पंजिबद्ध कर कानूनी कार्यवाही करने की माँग लगातार उठ रही है लेकिन प्रशासन की ढीला रवैय्या से अभी तक एफ आई आर नहीं हो सका है।इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय भी इस मामले में दोषी को बचाने का लगातार प्रयास किया है तथा अभी तक पीएच.डी. घोटाला के संबंध स्पष्टीकरण भी नहीं दिया है जो संशय को जन्म देता है। लगातार विवादों में रहे पीएच.डी. घोटाला से अब पर्दा उठाना ज़रूरी है क्योंकि इस पीएच.डी. घोटाला के प्रमाणित सबूतों को भी पुलिस तथा एस डी एम विजय डहेरिया को दे दिया गया है। प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी पहले भी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से बर्खास्त होकर जनजातीय विश्वविद्यालय में आए है, आईजीएनटीयू में अपनी ही पीएच.डी. छात्रा के शोध के लेकर चर्चा में भी है।

इसके कुछ प्रमुख बिंदु इसप्रकार है:-  
अकादमिक सत्र 2017 में प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी ने यह जानते हुए कि वह छात्रा अभी तक स्नातक की परीक्षा पास नही हो सकी है तथा उस छत्तीसगढ़ की छात्रा सुश्री विजेतना सिंह को पीएच.डी. बायोटेक्नोलाजी की प्रवेश परीक्षा दिलाने के लिए अपने साथ गोवा में ले गये।  बायोटेक्नोलाजी विषय के पीएच.डी. प्रवेश परीक्षा में उस छात्रा विजेतना सिंह ने पूरे भारत के सभी उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए अव्वल स्थान प्राप्त किया जबकि सुश्री विजेतना सिंह अपने अकादमिक केरियर में कभी बायोटेक्नोलाजी विषय पढ़ी ही नहीं है। बल्कि स्नातक में ही आठ से दस बार फैल होकर अभी भी स्नातक की परीक्षा दे रही है।     प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी ने अपने पद एवं पावर का दुरुपयोग करके सुश्री विजेतना सिंह को पीएच.डी. में प्रवेश दिलवा दिया, इस हेतु किया तथा बिना स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टी.सी.) के पीएच.डी. बायोटेक्नोलाजी की छात्रवृति दिलवाया है। अभीतक सुश्री विजेतना सिंह का नामांकन एवं प्रवेश बेचलर ओफ इंजीनियरिंग (बीई) इलेक्ट्रिकल के रूप में क्रिस्चियन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कैलाश नगर में वैध है, एकतरफ उस छात्रा का स्नातक की रेग्युलर छात्रा के रूप में वैध नामांकन जारी है जिसके आधार पर छात्रा पिछले सात-आठ वर्ष से लेकर इस वर्ष 2020 तक स्नातक की परीक्षा दे रही है। दूसरी ओर उसी छात्रा सुश्री विजेतना सिंह को प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी ने पीएच.डी. बायोटेक्नोलाजी में प्रवेश देकर रेग्युलर छात्रा की भाँति उसका नामांकन वैध करवा दिया है। अभी वर्तमान में उस छात्रा का दो जगह नामांकन वैध है:- पहला: रेग्युलर छात्रा के रूप में नामांकन नम्बर 3112410304 के तहत क्रिस्चियन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कैलाश नगर में वैध है, तथा दूसरा: रेग्युलर छात्रा के रूप में  नामांकन नम्बर/ रजिस्ट्रेसन नम्बर 17163004  के तहत पीएच.डी. बायोटेक्नोलाजी इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में भी वैध है। छत्तीसगढ़ के तकनीकी विश्वविद्यालय के क्रिस्चियन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कैलाश नगर तथा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में मौजूद दस्तावेजों को सत्यापित करते ही प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी द्वारा ईमानदारी में कमी, शासकीय पद का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, विश्वविद्यालय के साथ धोखाधड़ी करने के मामले स्वमेव प्रमाणित हो जाएँगे। प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी ने पीएच.डी. बायोटेक्नॉलोजी के कोर्सवर्क की परीक्षा के तीन अलग-अलग विषय में भी इस छात्रा को तीनों परीक्षा में उत्तीर्ण करवा दिया जबकि वह छात्रा इस वर्ष 2020 तक स्नातक की ही परीक्षा दे रही है। प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी ने सरकारी खर्च पर इस छात्रा को चाइना तथा दक्षिण कोरिया भेजने की सिफारिस किया तथा सरकारी खर्च का धोखा से उपयोग करते हुए उस छात्रा को अपने साथ दक्षिण कोरिया भी ले गया। वर्ष 2017 से बायोटेक्नॉलोजी विभाग के विभागीय शोध समिति से अनेक बार अनुशंसा कर उसकी पीएच.डी. को अनुमोदन देता रहा है। वर्ष 2020 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी शोध उपाधि समिति के बैठक में अनुमोदन दिया है तथा उस छात्रा का शोध शीर्षक “Optimization of freshwater algae for efficient production of bioenergy” का अनुमोदन कर दिया गया है। अभी तक स्नातक की परीक्षा में फैल हो रही छात्रा को पीएच.डी. के प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया टॉप करवाना एक बहुत संगीन अपराध का स्पष्ट प्रमाण है इसकी जाँच होने पर गैर शैक्षणिक पदों के भर्ती प्रक्रिया में आवेदनों के छानबीन करने, लिखित परीक्षा, स्किल परीक्षा में भी प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी के द्वारा किए गए अन्य बड़े अपराध का खुलासा होगा। जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में तकनीकी सहायक (भौतिक / रसायन शास्त्र) के पद पर न्यूनतम आहार्ता नहीं रखने वाली एक ऐसी उम्मीदवार का चयन किया गया जिसका सीधा संबंध प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी से है।   विश्वविद्यालय प्रशासन प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी के समस्त गलत कार्यों में लिप्त होने के बावजूद उन्हें भाँति - भाँति से लाभ पहुचाने के लिए कई जिम्मेदारी दिया है, विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता के साथ-साथ छात्र कल्याण संकाय का भी अधिष्ठाता बना दिया है, प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी से कोई भी छात्र कल्याण की उम्मीद ही नहीं कर सकता है तथा हाल ही में विश्वविद्यालय केंद्रीय खरीद समिति का अध्यक्ष पद भी दिया गया है। इसप्रकार से विश्वविद्यालय में गलत कार्य को अंजाम देने एवं भ्रष्टाचार करने वाले प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी को गलत कार्य करने के लिए प्रोत्साहन दिया गया है, इससे प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी का मनोबल बढ़ गया है ।प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी के शोध-निदेशन में रेग्युलर छात्रा के रूप में नामांकित छात्रा जिसका नामांकन नम्बर/ रजिस्ट्रेसन नम्बर 17163004  है तथा बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. कर रही है तथा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. की रेग्युलर छात्रा है इससे सम्बंधित निम्न जानकारी जनसम्पर्क अधिकारी से लेना आवश्यक है:-इस छात्रा ने बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. की प्रवेश परीक्षा हेतु भरा गया फोर्म को पब्लिक में उजागर किया जावें । वर्ष 2017 में बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. की प्रवेश परीक्षा हेतु परीक्षा केंद्र -गोवा से कुल कितने-कितने छात्र किस-किस विषय में सम्मिलित हुए थे? इसे पब्लिक में उजागर किया जावें ।   इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक से वर्ष 2017 में बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. की प्रवेश परीक्षा हेतु परीक्षा केंद्र -गोवा के लिए किस अध्यापक को विश्वविद्यालय से भेजा गया था, उस अध्यापक के गोवा जाने-आने एवं गोवा में प्रवेश परीक्षा आयोजित करवाने से सम्बंधित समस्त दस्तावेज को पब्लिक में उजागर किया जावें । वर्ष 2017 में बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. की प्रवेश परीक्षा के पश्चात परीक्षा परिणाम की जानकारी एवं इससे सम्बंधित समस्त दस्तावेज को पब्लिक में उजागर किया जावें । वर्ष 2017 में बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. में प्रवेश लेने के लिए उक्त छात्रा (नामांकन नम्बर/ रजिस्ट्रेसन नम्बर 17163004 ) द्वारा जमा किया गया स्थानांतरण प्रमाणपत्र एवं स्नातक एवं स्नाकोत्तर परीक्षा के अंतिम अंकसूची तथा स्नातक एवं स्नाकोत्तर की डिग्री को पब्लिक में उजागर किया जावें । वर्ष 2017 में बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. में प्रवेश लेने वाली उक्त छात्रा (नामांकन नम्बर/ रजिस्ट्रेसन नम्बर 17163004 ) का विभागीय शोध समिति (DRC) द्वारा कितनी बार शोध के प्राग्रेस रिपोर्ट का अनुमोदन किया गया है समस्त विभागीय शोध समिति के मिनट्स की छायाप्रति सहित अन्य समस्त जानकारी एवं दस्तावेज देवें। उस छात्रा का शोध शीर्षक “Optimization of freshwater algae for efficient production of bioenergy” का अनुमोदन कब किया गया है। तथा उस छात्रा को अभी तक दी गयी छात्रवृत्ति की रक़म को पब्लिक में उजागर किया जावें । वर्ष 2017 में बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. में प्रवेश लेने वाली उक्त छात्रा (नामांकन नम्बर/ रजिस्ट्रेसन नम्बर 17163004 ) का कोर्स वर्क सेमेस्टर की परीक्षा पास होने से सम्बंधित दस्तावेज देवें तथा उसके पीएच.डी. कोर्सवर्क के रिज़ल्ट पास होने के पश्चात जारी अंकसूची एवं इस परीक्षा की उत्तरपुस्तिका को पब्लिक में उजागर किया जावें । वर्ष 2017 में बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. में प्रवेश लेने वाली उक्त छात्रा (नामांकन नम्बर/ रजिस्ट्रेसन नम्बर 17163004 ) का शोध उपाधि समिति (RDC) द्वारा शोध के प्राग्रेस रिपोर्ट का अनुमोदन कब किया गया है समस्त शोध उपाधि समिति (RDC) के मिनट्स की छायाप्रति सहित अन्य समस्त जानकारी एवं दस्तावेज को पब्लिक में उजागर किया जावें । प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी के शोध-निदेशन में रेग्युलर छात्रा के रूप में नामांकित छात्रा जिसका नामांकन नम्बर/ रजिस्ट्रेसन नम्बर 17163004  है तथा बायोटेक्नोलाजी विषय में पीएच.डी. कर रही है, यह छात्रा कब - कब विदेश जाने के लिए आवेदन दिया उन समस्त आवेदनों की छायाप्रति देवें साथ ही वह विदेश कब गयी इसकी जानकारी देवें तथा उस छात्रा के साथ प्रो भूमिनाथ त्रिपाठी के जाने की भी जानकारी हो तो उससे सम्बंधित दस्तावेज़ को पब्लिक में उजागर किया जावें ।