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मप्र में मचे सियासी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्यपाल से मिलने पहुंचे
March 13, 2020 • NEWS NETWORK VISHVA SATTA

 

मध्य प्रदेश में सियासी उठापटक जारी है. कांग्रेस और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले 22 कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे के बाद से कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं तो बीजेपी शक्ति परीक्षण  के जरिए सत्ता पर काबिज होने की जुगत में है। राज्यपाल लालजी टंडन गुरुवार देर रात लखनऊ से भोपाल लौट आए। मुख्यमंत्री कमलनाथ उनसे मिलने राजभवन पहुंचे। यहां उन्होंने विक्ट्री साइन दिखाया।कांग्रेस ने भाजपा का जवाब देने की तैयारी कर ली है। पहला कदम होगा, बेंगलुरू में रखे गए सिंधिया समर्थक विधायक जब तक पेश नहीं होते, तब तक कांग्रेस सदन में फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं जाएगी। कमलनाथ राज्यपाल से अपने मंत्रिमंडल से 6 मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश मंजूर करने का आग्रह करेंगे। वे राज्यपाल के सामने विधायकों को वापस लाने की बात रख सकते हैं।कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका को लेकर भी आश्वस्त है। इस्तीफा स्वीकार करने में समय लगता है तो वह कांग्रेस के पक्ष में होगा। इससे बहुमत में सरकार बनी रहेगी। बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष हंगामा करता है तो स्पीकर सख्त फैसले ले सकते हैं। कांग्रेस बेंगलुरु से विधायकों के आने पर उनके परिजन और क्षेत्र के लोगों को सामने रखेगी, ताकि वे सोचने पर मजबूर हो जाएं कि दोबारा चुनाव में जाते हैं तो क्या दिक्कत आ सकती है? कांग्रेस को लगता है, भाजपा सिंधिया समर्थक विधायकों को सदन से गैरहाजिर रखना चाहती है। बहरहाल, यदि सिंधिया खेमे के विधायक नहीं आते हैं और इस्तीफा मान्य नहीं होता है तो सदन की कार्रवाई चलती रहेगी।वही २६मार्च को होने वाले राजयसभा चुनाव के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया व सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया शुक्रवार को नामांकन दाखिल करेंगे।क्युकी  आज राज्यसभा के लिए पर्चा दाखिल करने का आखिरी दिन है ।