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कांग्रेस के असंतुष्ट दावेदार बिगाड़ सकते हैं कांग्रेस का खेल भाजपा प्रत्याशी से सांठगांठ के चलते सर्वे रिपोर्ट हुई फेल 
September 13, 2020 • विनोद पान्डेय

                           

अनूपपुर /कांग्रेश द्वारा 15 सीटों की टिकट वितरण के बाद अनूपपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेश के तमाम दावेदार प्रत्याशी अब एकजुट हो चुके हैं और यह कांग्रेस का खेल पूरी तरह से बिगाड़ सकते हैं।पता चला है कि कांग्रेस के प्रबल दावेदारों ने टिकट वितरण में भाजपा के दावेदार बिसाहूलाल सिंह से टिकट दिलाने वालों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 40 पोलिंग बूथ वाले को कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया है जबकि 180 पोलिंग बूथ में रहने वाले कांग्रेसी दावेदारों को दरकिनार कर दिया।तमाम सर्वे रिपोर्ट में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रमेश कुमार सिंह का नाम सबसे आगे था।उसके बावजूद कांग्रेस ने प्रबल जीत के दावेदारों को दरकिनार करते हुए कांग्रेस का डमी कैंडिडेट अनूपपुर उपचुनाव के लिए मैदान में उतारा है।अनूपपुर शहरी क्षेत्र में एवं ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेश से एकदम फ्रेश कैंडिडेट को लेकर रमेश कुमार सिंह पर चर्चा शुमार थी और लोगों की पहली पसंद वह बन चुके थे। लेकिन कांग्रेसका नामोनिशान अनूपपुर जिले में अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र में मिटाने के लिए कुछ लोगों ने गलत जानकारी भोपाल दरबार तक पहुंचा कर बिल्कुल डमी कैंडिडेट को अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित कराने का काम किया और उसमें उनको सफलता भी मिल गई।लेकिन जबसे कांग्रेस में विश्वनाथ के नाम की बयार चली है तो पूरे अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र में यह चर्चा आम हो गई कि भारतीय जनता पार्टी पूरे प्रदेश के अंदर सर्वाधिक मतों से जीतने वाली एकमात्र पार्टी होगी।क्योंकि मंत्री बिसाहूलाल सिंह के सामने विश्वनाथ सिंह का कद कुछ भी नहीं है।उनकी पकड़ कहीं नजर नहीं आ रही शहरी क्षेत्र सहित गांव गांव में मात्र बिसाहूलाल सिंह ही लोगों को नजर आने लगे।अगर वक्त रहते मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने अनूपपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं बदला तो हो सकता है कि कांग्रेस पार्टी की जमानत भी विश्वनाथ को टिकट दिलाने वाले नहीं बचा पाएंगे।आज की स्थिति में अगर कांग्रेस के असंतुष्ट एक होकर निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ गए तो कांग्रेस तीसरे नंबर पर अनूपपुर विधानसभा उपचुनाव में अपना स्थान पाएगी।कांग्रेस के अंदर बवाल मच गया है और जानबूझकर भाजपा प्रत्याशी को जिताने वाला निर्णय लिए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। प्राप्त जानकारी अनुसार टिकट वितरण से जमीनी कार्यकर्ताओं में आक्रोश है कि इस फैसले से कांग्रेस ने जीती हुई सीट पर वाक ओवर दे दिया है। इसी माहौल का फायदा उठाने की कोशिश में टिकट से वंचित प्रत्याशी एक हो गए हैं और उनकी मांग है कि सर्वे मैं जिस प्रत्याशी का नाम आया है उसे प्रत्याशी घोषित किया जाए।सूत्र बताते है कि यदि अनूपपुर में पार्टी ने उम्मीदवार को नहीं बदला तो पार्टी के खिलाफ समानांतर गतिविधियां शुरू हो सकती है। और प्रदेश एवम आलाकमान को खुली चुनौती देने के संकेत साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे हैं। इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थानीय पार्टी के नेताओं को विश्वास में नहीं लेने उनकी अनदेखी किए जाने से ये दावेदार नाराज बताए जाते हैं। हालाकि बागियों को अभी भी उम्मीद है कि टिकट परिवर्तन होगा स्थानीय आदिवासी नेताओ को नकारे जाने से पार्टी को पूरे क्षेत्र में बड़ा नुकसान होगा। सूत्र बताते है कि असंतुष्ट दावेदार किसी भी स्थिति तक जा सकते है और वे किसी भी हालत में पार्टी के घोषित प्रत्याशी के पक्ष में सहमत नहीं है जिसके चलते पार्टी के निर्णय के खिलाफ बागी प्रत्याशी मैदान में हो सकता है।बताया जाता है कि अनूपपुर क्षेत्र में रमेश सिंह की दावेदारी को मजबूत बताया जा रहा था और अब घोषित किए गए प्रत्याशी के अलावा सभी दावेदार रमेश सिंह के पक्ष में एकजुट है और आगे पार्टी पर निर्णय बदले जाने के लिए ऊपर तक जाने की तैयारी है। आगे क्या होता है यह तो भविष्य बताएगा किन्तु विरोध के चलते अनूपपुर सीट पर कांग्रेस की स्थिति चुनाव के पहले ही लड़खड़ाती दिखाई देने लगी है।