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चौथे स्तम्भ ने जिला प्रशासन के खिलाफ कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन:कैद में मीडिया
November 14, 2019 • विनोद पांडेय • मध्यप्रदेश

शहडोल/संवेदनशील एवं मानवीय मूल्यों के प्रति सजग व्यक्ति ही  पत्रकार होते हैं। कोई भी खबर किसी एक व्यक्ति के लिए या प्रशाशन की खबरे दिखने के लिए  नहीं,बल्कि पूरे समाज के लिए होता है और पत्रकार जब निर्भीक और निडर होकर अपनी बात कहता है आलोचना करता है , तो समाज में निश्चित ही उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है लेकिन मध्यप्रदेश का एक जिला अनूपपुर जहा पत्रकारों  की स्थिति इन सबके बिपरीत है ,प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ कहते है  क़ि पत्रकार  निष्पक्षता के साथ निडर होकर सरकार से प्रश्न पूछें और आलोचना भी करें  वो कहते है  कि मुझे बहुत सुविधा होती है, जब मैं अपनी सरकार की योजना और व्यवस्था की आलोचना अखबारों में पढ़ता हूँ। मैं उस पर एक्शन लेता हूँ। इससे मुझे अपनी सरकार की कमियों को दूर करने में सहायता मिलती है।लेकिन  अनूपपुर जिले का प्रशासन इन सब बातो से सरोकार नहीं नहीं रखता बिगत कुछ माह से   प्रशासन के खिलाफ समाचार लिखने या आलोचना करने पर  टारगेट बना कर पत्रकारों के खिलाफ षड्यंत्र पूर्वक कार्यवाही की जा रही है ,संभाग के सभी पत्रकार इसका सांकेतिक बिरोध भी करते आ रहे है इसी तारतम्य में आज  १४ नवम्बर को अनूपपुर ,शहडोल उमरिया के सैकडों पत्रकार पत्रकारिता में आ रही दिक्कतों को लेकर ,शहडोल कमिश्नर आर बी प्रजापति को ज्ञापन सौंपने काली पट्टी बांध कर पहुंचे और अनूपपुर जिले मे स्वतंत्र पत्रकारिता के दौरान आ रही दिक्कतों की चर्चा भी की ,ज्ञापन में पत्रकारों ने  कहा है कि अनूपपुर जिले में हमेशा निष्पक्ष, स्वतंत्र, भयमुक्त पत्रकारिता होती रही है। विगत  कुछ माह से योजनाबद्ध तरीके से पत्रकारों को टारगेट किया जा रहा है। समाचार प्रकाशन उपरांत पत्रकारों के विरुद्ध पुलिस तथा प्रशासन की गतिविधि स्वतंत्र, निष्पक्ष , निर्भीक पत्रकारिता के लिये घातक हो रही है जहा कमिश्नर आर बी प्रजापति.पत्रकारों से  निडर हो कर पत्रकार करने क़ि बात कही । कुछ घटनाओं को भी संज्ञान में लाया गया जिसमे प्रमुख रूप से  1-  राजेन्द्रग्राम के पत्रकार अजय जायसवाल के विरुद्ध शान्ति समिति की बैठक में अधिकारियों की उपस्थिति में कुछ लोगों ने अपशब्द कहे । बाद में पत्रकार के विरुद्ध ही शिकायत दर्ज कर ली गयी । 2- कोतमा के पत्रकार विनय उपाध्याय द्वारा आरटीओ चेक पोस्ट के विरुद्ध समाचार चलाया गया तो समाचार प्रकाशन के बाद ही ऋतु तिवारी ,प्रभारी चेकपोष्ट ने मामला दर्ज करवा दिया।  3 - कोतमा मे पत्रकार राजेश पयासी की बेटी के विवाह के बाद सुबह रिश्तेदारों को स्टेशन छोडने गये युवकों की पुलिस ने बेवजह पिटाई की। शिकायत की गयी ,लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गयी ।4- प्रदेश टुडे के जिला व्यूरो प्रदीप मिश्रा ने बरगंवा पंचायत में शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार के विरुद्ध समाचार प्रकाशन किया। शिकायत भी की। जांच अधिकारी ने जांच के नाम पर पत्रकार को मॊके पर बुलवा लिया । जहाँ सरपंच ने उस पर हमला कर दिया ।कोई कार्यवाही नहीं की गयी।  उल्टा पत्रकार पर मामला दर्ज किया गया ।5- ग्लेज इंडिया की खबर पर पत्रकार विजय उरमलिया के कार्यालय में घुसकर उन्हे धमकाया गया। सोशल मीडिया मे गाली दे कर ,धमकियां दी गयी। जिनकी साक्ष्य सहित शिकायतकरने  पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। बल्कि कोतवाली निरीक्षक की सह पर आरोपियों की शिकायत पर पत्रकार के विरुद्ध जांच खडी कर दी गयी।6- पत्रकार अमित शुक्ला ने जिला पंचायत के विरुद्ध खबर छापी।  जिस पर कलेक्टर ने ही नोटिस भेज दिया।
 कमिश्नर को बतलाया गया कि समाचार प्रकाशन उपरांत उसे संज्ञान  मे ना लेकर ,कोई जांच ना करवा कर पत्रकारों के विरुद्ध ही शिकायतें दर्ज होना पत्रकार संरक्षण के सिद्धान्तों के विपरीत है। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि पत्रकारों के विरुद्ध शिकायत की जांच डी आई जी स्तर के अधिकारी से करवा कर ही की जा सकती है। विगत कुछ माह मे एक के बाद एक पत्रकारों के विरुद्ध पुलिस/ प्रशासन का गैर जिम्मेदार रवैया स्वतंत्र, निष्पक्ष, निर्भीक पत्रकारिता के विरुद्ध है। ज्ञात हो क़ि विगत १४ दिन से अनूपपुर जिले के पत्रकार आन्दोलन पर हैं। अयोध्या निर्णय जैसे संवेदनशील मामले में पत्रकारों को भरोसे में नहीं लिया गया, ना ही पत्रकार वार्ता की गयी।कमिश्नर से अपील की गयी है कि पत्रकारों को भयमुक्त ,दबावरहित,स्वतंत्र पत्रकारिता का माहौल प्रदान करने के लिये समुचित पहल की जाए।