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बकिया नहर से 200 गायों को प्रशासन ने निकाला सुरक्षित.
September 11, 2020 • विनोद पान्डेय

 

 फसलों को बचाने के लिये गायों को नहरों में धकेल देते हैं लोग .

 

अनूपपुर / धेनु सेवा संस्थान तथा प्रदेश की मीडिया द्वारा लगातार ध्यानाकर्षण करने के चार दिन बाद सतना जिला प्रशासन हरकत मे आया तथा रामपुर बघेलान के नजदीक बकिया नहर में फंसी 200 से अधिक गायों को सुरक्षित बाहर निकाला गया‌। इन सभी गायों को नहर से निकालकर गौशाला पहुंचाया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार नहरों में गायों को धकेले जाने की सूचनाओं पर कार्यवाही करते हुए कलेक्टर अजय कटेसरिया के निर्देशन में प्रशासनिक टीम द्वारा गुरूवार को प्रातः 7 बजे से कार्यवाही कर बकिया बांध के पास नहर में फंसे 200 मवेशियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया। इन सभी गायों को सिरमौर के बसामन मामा गौशाला में पहुंचाया गया है।  कार्यवाही के दौरान नहर के अंदर 10 किलोमीटर की दूरी तक 200 मवेशी मिले हैं। शुरूआत में सिर्फ 30 से 35 मवेशी ही दिखाई दे रहे थे। बाद में इनकी संख्या बढ़कर 200 तक पहुंच गई। कलेक्टर के निर्देश पर पहली बार प्रशासन ने गायों को बचाने की कार्यवाही की। इससे पहले आसपास गाँव के लोगों द्वारा डायल 100 तथा पुलिस, प्रशासन को सूचना देने पर भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती थी। इस मौके नायब तहसीलदार, आरआई, पटवारी तथा एमपीईबी, टोन्स बकिया के कर्मचारियों ने घंटों मशक्कत की तथा सराहनीय कार्य किया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा गायों के संरक्षण के लिये तमाम तरह की योजनाओं के संचालन के बावजूद गायों से क्रूरता की तमाम घटनाएँ सामने आती रही हैं। इस मामले में सतना जिले के उचेहरा स्वार्थी तत्वों द्वारा दर्जनों गायों को गहरी नहर में फेंक दिया गया था । नहर काफी गहरी होने से वहाँ कुछ गायें भूख से मर गयीं, कुछ पानी में बह कर। पांच से सात गायों को वहाँ नहर में फंसा देख सतना के समाजसेवी युवक ऋषि त्रिपाठी ने इसकी सूचना धेनु सेवा संस्थान ,शहडोल को दी। बीते सोमवार ,7 सितंबर को धेनु सेवा संस्थान के सहयोगी सदस्यों आनंद मिश्रा, विनय पाण्डेय, ऋषि त्रिपाठी,अहिमर्दन द्विवेदी, यदु वसुदेव शुक्ला, वसुराज,अमन ने उचेहरा के समीप झुरखुलू से परसमनिया पोरा नहर से पांच गायों को रेस्क्यू किया था।  दो दिन बाद ही बकिया बराज मे दर्जनों गायों के फंसे होने की सूचना मिली। जिसकी जानकारी देने के 24 घंटे बाद कलेक्टर सतना के आदेश पर सरकारी अमला सक्रिय हुआ । तब जाकर दो सौ से अधिक गायों को बचाया जा सका। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिये जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। ताकि निरीह गायों की जान बच सके। बहरहाल सैकडों गायों की जानें बचाने के लिये सतना जिला प्रशासन तथा उनकी टीम सराहना तथा बधाई की पात्र है।