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हनीट्रैप मामले की जाँच के लिए  एसआईटी का गठन, इंजीनियर हरभजन सिंह निलंबित; कोर्ट में सीबीआई जांच के लिए दो याचिका
September 23, 2019 • NEWS NETWORK VISHVA SATTA


इंदौर: मध्‍य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक महकमों में तहलका मचाए हुए सेक्‍स स्‍कैंडल/ हनी ट्रैप का मामला अब एमपी हाई कोर्ट में पहुंच गया है. वहीं, मध्‍य प्रदेश पुलिस मुख्‍यालय ने आईजी सीआईडी श्रीनिवास वर्मा के नेतृत्व में अधिकारियों और नेताओं की ब्‍लैकमेलिंग के मामले की जांच के लिए स्‍पेशल इन्‍वेस्‍ट‍िगेशन टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया है. मंगलवार से इस पूरे मामले की जांच एसआईटी करेगी। वहीं मामले में इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह को निलंबित कर दिया गया।
इंदौर खंडपीठ में  याचिकाये  दायर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सोमवार को दिग्विजय सिंह भंडारी ने जनहित याचिका दायर कर हाल ही में सामने आए हनी ट्रैप मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंपे जाने की मांग की गई है. याचिका में आशंका जताई गई है कि सूबे के राजनेताओं के दखल से इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण की जारी पुलिस जांच पर असर पड़ सकता है. याचिकाकर्ता के वकील मनोहर दलाल ने मीडियाकर्मियों से कहा, “हमें संदेह है कि मध्य प्रदेश पुलिस हनी ट्रैप मामले के राज छिपा रही है, ताकि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा सके. इसलिये व्यापक जनहित में जरूरी है कि इस मामले की जांच पुलिस से लेकर केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी जाए, ताकि इसकी जांच राज्य के राजनेताओं के दखल से दूर रह सके,इसी प्रकार की एक अन्य याचिका विपिन शर्मा ने वकील नरेन्द्र कुमार जैन के माध्यम से दायर की। इस याचिका में इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह को आरोपी बनाने की मांग की गई है।

 


बता दें कि पुलिस ने इंदौर नगर निगम के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर बृहस्पतिवार को हनी ट्रैप गिरोह का खुलासा किया था. गिरोह की पांच महिलाओं समेत छह सदस्यों को भोपाल और इंदौर से गिरफ्तार किया गया था. नगर निगम अधिकारी ने पुलिस को बताया कि गिरोह ने उनके कुछ आपत्तिजनक वीडियो क्लिप वायरल करने की धमकी देकर उनसे तीन करोड़ रुपये की मांग की थी. ये क्लिप खुफिया तरीके से तैयार किए गए थे. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक गिरोह पर संदेह है कि वह राजनेताओं और नौकरशाहों समेत कई प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसा चुका है. इस बारे में विस्तृत जांच जारी है.