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पांच वर्ष में रुपया दोगुना करने का लालच देने वाले श्रृष्टिवेयर इंडस्ट्रिज के संचालक की जमानत याचिका ख़ारिज
August 9, 2019 • NEWS NETWORK VISHVA SATTA

अनूपपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय के द्वारा आदेश 8 अगस्त के द्वारा कोतवाली अनूपपुर के अपराध क्रमांक 167/16 के आरोपीगण जगदीश प्रसाद चर्मकार एवं नंदौआ राठौर तत्काली संचालक श्रृष्टिवेयर इंडस्ट्रिज लिमिटेड जैतहरी रोड अनूपपुर की जमानत याचिका खारिज करने का आदेश पारित किया गया है। आरोपी जगदीश प्रसाद चर्मकार को 7 जनवरी 2019 तथा नन्दौआ राठौर को 18 मार्च 2019 को संबंधित अपराध में गिरफ्तार किया गया था, तबसे आरोपी लगातार जेल में है इसके पूर्व उनके द्वारा 11 जनवरी 2019 को जमानत आवेदन द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनूपपुर के न्यायालय में लगाया गया था, जो खारिज हुआ था। आरोपियों के द्वारा ये दूसरा जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिसे संदर्भित आदेश के न्यायालय द्वारा खारिज किया गया है। मामले की जानकारी देते हुए म.प्र. निक्षेपकों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत घोषित विशेष लोक अभियोजक एवं जिला अभियोजन अधिकारी ने बताया की आरोपीगण श्रृष्टिवेयर इंडस्ट्रिज लिमिटेड कंपनी अनूपपुर में जो की वर्ष 2014 से वर्ष 2016 तक न्यायालय के निकट संचालित थी के संचालक पद पर उक्त कंपनी द्वारा अनूपपुर की जनता के साथ कपटपूर्वक छल कर यह विश्वास दिलाकर की यह शासकीय बैंक है एवं इसमें पैसा जमा करने पर पांच वर्ष में डबल तथा हर माह ७०० रूपए बोनस मिलेगा, एैसा लालच देकर बेईमानी पूर्वक ढंग से हितग्राहियों का ३ करोड 10 लाख 59 हजार तीन सौ एक रूपए जमा कराकर कार्यालय में ताला लगाकर भाग गए थे, प्रकरण के दोनो आरोपीगण ने न्यायालय में अपनी जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत किए थे, जहां पर विशेष लोक अभियोजन एवं थाना प्रभारी कोतवाली अनूपपुर द्वारा इस आधार पर जमानत आवेदन का विरोध किया गया कि आज तक पीडित हितग्राहियों का जमा किया गया पैसा वापस नही हुआ है, कंपनी नॉन-बैकिंग की आड़ में बैंकिंग का कार्य कर बैंकिग विधि का उल्लंघन कर पीडि़त हितग्राहियों के साथ एवं शासन के साथ भी छल कारित किया है, आरोपीगण कंपनी के जिम्मेदार पद पर कार्यरत थे यदि जमानत का लाभ दिया गया तो वे विवेचना में व्यवधान उत्पन्न करेगे। न्यायालय द्वारा प्रकरण के दस्तावेज एवं उक्त तर्को से सहमत होकर न्यायालय द्वारा उक्त दोनो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की गई।